कमजोर पश्चिमी विक्षोभ का अंतिम चरण: उत्तर भारत में अगले 36 घंटों में हल्की बारिश के आसार
- By Gaurav --
- Monday, 23 Mar, 2026
Weak Western Disturbance in Final Phase,
उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ को लगभग दो दिन हो चुके हैं। इसके प्रभाव से पश्चिमी राजस्थान के कुछ जिलों में हल्की बारिश की गतिविधियां देखने को मिली हैं और आज भी सीमित क्षेत्रों में बूंदाबांदी जारी है।
मौसम विभाग के अनुसार इस सिस्टम का असर आज देर रात से पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में हल्के रूप में शुरू हो सकता है, जहां शुरुआत बूंदाबांदी से होने की संभावना है। कल सुबह इसके प्रभाव में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, जब पाकिस्तान और राजस्थान की ओर से नमी से भरे बादल सक्रिय होकर धीरे-धीरे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ेंगे।
दिन के दौरान स्थानीय स्तर पर नए बादलों का निर्माण भी होगा, जिसके कारण पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में गरज के साथ हल्की बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज बौछारें या ओलावृष्टि की संभावना भी बनी हुई है, हालांकि कई क्षेत्रों में बादल बिना बरसे आगे भी निकल सकते हैं।
उत्तर मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में भी दिन के समय हल्की बारिश या बूंदाबांदी संभव है, जबकि मध्य प्रदेश के अंदरूनी हिस्सों में मौसम की गतिविधियां सीमित और स्थानीय स्तर पर ही रहने की संभावना है।
इस सिस्टम के गुजरने के बाद 24 मार्च से मौसम धीरे-धीरे साफ होने लगेगा। तापमान में हल्की गिरावट के कारण मौसम सुहावना महसूस होगा। साथ ही 24 और 25 मार्च को मैदानी इलाकों में सुबह के समय हल्का कोहरा भी देखने को मिल सकता है।
इसके बाद 25 मार्च की शाम से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत की ओर बढ़ने की संभावना है, जिसके प्रभाव को लेकर आगे जानकारी सामने आएगी।
राजस्थान में मौसम को लेकर चेतावनी
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 28, 29 और 30 मार्च को राजस्थान में एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मेघगर्जन, बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।
पिछले चार दिनों से हो रही बेमौसम बारिश के कारण किसानों की फसलों को पहले ही नुकसान पहुंचा है। ऐसे में आने वाला मौसम किसानों की चिंता और बढ़ा सकता है। खेतों में खड़ी फसलें लगातार खतरे में हैं और किसानों को भारी नुकसान का डर सता रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम के इस बदले मिजाज को देखते हुए किसानों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानी बरतने की जरूरत है।